हिता !
साहिर को सुनाऊं ?
प्यार पर बस तो नहीं है मेरा लेकिन फ़िर भी
तू बता दे के तुझे प्यार करूं या न करूं ?
अपने होठों के तबस्सुम से संवारा जिनको
उन तमन्नाओं का इज़हार करूं या न करुँ ?
कहीं ऐसा न हो पाओं मेरे थर्रा जाएँ
औ तेरी मरमरी बाहों का सहारा न मिले
अश्क बहते रहें खामोश सियाह रातों में
औ ' तेरे रेशमी आँचल का कनारा न मिले
प्यार पर बस तो नहीं है मेरा लेकिन फ़िर भी ...........
क्यूं सुना रहा हूँ हिता मालूम है ..........तुम्हें ?
वही कहने जा रहा हूँ ...पर पहले ये तो कह दूँ की प्यार के क्या मानी मेरे ......
और तुम भी तो कहो क्या मानी तुम्हारे भी ......??
आज जानता हूँ तुम सजी होगी .........ना जाने कितना ।
दुल्हन बन कर ।
दुल्हन की तरह कहूं तो बे मानी ..........
वैसे तो हमेशा ही सजती रही हो मेरे लिए ।
कब किस दुल्हन से कम सजी मिलीं मुझे ?
वह भी सिर्फ़ मेरे लिए !
कौन सा श्रृगार किया होगा ........
मन में न जाने कितनी सूरतें आती हैं , कितनी तो चली जाती हैं ।
मेरी यादें तो बस तुम्हारे चहरे पे ही ठिठक कर रह जा रही हैं ।
अपनी कल्पनाओं में ..........बस ठगा सा तुम्हें निहारता .......
सब यादें बस वहीं ठहर जाती हैं ............
वक़्त थम सा गया हो ज्यूं !!
बस उन पतले पतले होठों में सिमट कर रह जाता हूँ तुम्हारे ।
धरे उन लबों को अपने लबों बीच
तुम्हारी अधमुंदी आंखों में झांकता
कंधे पे मेरे सर धरे .......के चाँद सजा हो .
बाहों में बंधे से मेरे ......ज्यूं भाग्य बंधा हो ।
बस उन्हीं यादों से बहल कर रह जाता हूँ !
-----------तो कुछ अपनी भी सुनाऊं ??..........उन्हीं यादों के नाम !
हम मचले से मचले से समाते तेरे भीतर,
तुम सहमे से सहमे से सिमटते मेरे अन्दर........
कोई एक सेज हवाओं पे सजा आया हूँ ....
कोई एक गीत फिजाओं को सुना आया हूँ ...
मेरी गुन गुन .....से सजी .....
तेरी वो रून झुन . रून झुन .....
याद है ?
याद है प्यार के उन नगमों की
प्यारी हर धुन ....
मैं भी बस गुन गुन गुन .....
तेरी पायल रून झुन .....
लगता कानों में तू कहती हुयी बस....
सुन सुन सुन .........
आ तुझे फ़िर उन्हीं यादों में घुमा कर लाऊँ.....
आ तुझे फ़िर उन्हीं ख़्वाबों को दिखा कर लाऊँ
अय मेरी रात की रानी की महक... पागल सी !
आ मेरी साँस में बस मुझको सुवासित कर दे
आ मेरी बांह में बंध ख़ुद को समाहित कर दे
आ मेरी नींद को ख्वाबों में प्रवाहित कर दे
मुझको वो दे ना सकी ? भूल महज़ वादा था !
मैं भी तो पा न सका , छोड़ बस इरादा था !
वही खुशबू मेरे सपनों में सजी रहने दे
वही यादें मेरी किस्मत में बसी रहने दे
उम्र बस तेरे ख्यालों से बहल जायेगी
काफी गुज़री है ज़रा और गुजर जायेगी
भूल जाऊंगा वो ख्वाबों से सजायी दुनिया
तेरे वादों की कभी याद भी न आयेगी ........
वादों को कब का तेरे दर पे छोड़ आया हूँ
बस तेरी याद की डोली ही उठा पाया हूँ
तू तो दुल्हन बनी , तुझको तो सितारों से नवाज़ ,
अपने जीने का कुछ सामान उठा लाया हूँ
अपनी यादों से ही बस मुझको बहल जाने दे
अपने ख्यालों में ही कुछ दूर टहल आने दे
मैंने जो गीत कभी प्यार में तेरे थे लिखे
आज उन गीतों को दुनिया को सुना आने दे
कहने दे आज भी , हर साँस का हिस्सा तू है
क्या हुआ पास नहीं , मेरा ही हिस्सा तू है
ज़िंदगी साथ गुजरती तो हाँ सपना होती ,
खैर जब साथ नही तब भी तो किस्सा तू है
दिल की धड़कन का मेरी तू ही तो अफ़साना है
इक हकीकत न सही , जीने का बहाना है
अपना किस्सा यही दुनिया को बताने निकला
कहने निकला की हाँ बारात तेरी आयी है
डोली उठ जाए भले , गैर की अमानत तू
लब न बोलेंगे की उलफत की सज़ा पायी है .
जीने मरने के सब अरमान भरम बन बैठे
उन्हीं अरमानों के बस गीत बनाने निकला
जो तेरे सपने सजाते उन्ही नगमातों को
आज दुनिया की हर इक शै को सुनाने निकला
आज महफ़िल को हर इक अपना बनाने निकला .
लब जो खामोश तो क्या दिल धुवां बन कर निकला
तू भी सुन ले उन्हीं बिछडे हुए अरमानों को
जो तेरे दर पे सुना आया सुनाने निकला
भूले बिसरे से कभी याद जो आए मेरी
कोई मासूम सा ज़ज्बात सताए कोई
जब लगे याद को , मैं पास तुम्हारे होता
जब लगे काश की मैं साथ तुम्हारे होता
जब लगे टूट गया क्यूं वो हमारा सपना
जब लगे क्यूं है नहीं पास कोई सा अपना
जब लगे ज़िंदगी किस ओर हमें लाई है
मनमे अपने यही विश्वास बनाये रखना
मैं कोई दूर नहीं जब भी पुकारे मुझको
मैं कोई दूर नहीं जब भी बुलाले मुझको
वहीं ठहरा हूँ जहाँ छोड़ के आया था मुझे
अब भी मैं , मैं ही हूँ , तेरा ही कोई सा अपना
वही उम्मीद कहीं मन में बसाये रखना
उसी अपने को भी यादों में बनाये रखना
उन्हीं सपनों के भी कुछ तुकडे बचाए रखना
अपने दामन में वही ख्वाब सजाये रखना
हाँ भरी दुनिया से थोड़ा सा छुपाये रखना
मैं कोई दूर नहीं , लौट के आ भी न सकूं
मैं तेरे पास हूँ उम्मीद , बचाए रखना
आज हाँ आज है , तू दूर मेरी दुनिया से
कल भी आएगा ,ये अरमान सजाये रखना
अपने होठों पे मेरे गीतों को गाये रखना
एक मद्धिम सी शमा दिल में जलाये रखना
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ab ye baat hogee hogee hee "
ReplyDeleteहिंदी ब्लॉग की दुनिया में आपका स्वागत है...
ReplyDeletehay hay.........................maar dala
ReplyDeletemaza aagaya
BADHAI
Mere kwabo ke jharokho ko sajane wali,
ReplyDeleteter kwabo me kahi mera gujar hai ki nahi.
puchh kar apni nigaho se bata de mujhko,
meri rato ke mukaddar me seher hai ki nahi.
WAH........Wah........wah sahab,muddato bad SAHIR ko fir paya .Aanand aa gaya. Sadhuwad
aur us par aapki Racha jaise sone pe sugaga ya ek ke sath ek muft.Maza aa gaya.
प्यार पर तो बस नहीं है आपका, फिर भी..
ReplyDeleteबेहतर भावाव्यक्ति.....
itna badha pyar. narayan narayan
ReplyDeleteप्रिय बन्धु ,और भी गम हैं ज़माने में मुहब्बत के सिवा उधर भी मुड़ कर देखो
ReplyDeleteबहुत ही सुंदर लिखा है आपने। चिट्ठाकारी में आपका स्वागत है।
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